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परिचय.....

Posted On: 28 Mar, 2012 Others में

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नमस्कार,
मैंने कई ब्लॉग, कई कहानियां पढ़ी जिसमे पुरुष स्त्री को दोष देता है और स्त्री पुरुष को लेकिन ये कहाँ तक सही है ?
आज ही एक ब्लॉग पढ़ा “इस तरह के पुरुषों को आप क्या कहेंगे?” मुझे ऐसा लगता है अगर किसी लड़की के साथ कुछ बुरा हो रहा है तो कही न कही वो लड़की भी ज़िम्मेदार है उस बुरे बर्ताव के लिए… आजकल लड़कियां इतनी बुद्धिहीन नहीं हैं की किसी को समझ न पायें… यह तो असंभव जान पड़ता है की कोई लड़का अचानक से किसी लड़की को छोड़कर किसी और से शादी कर ले… चार साल तक क्या वह प्यार का नाटक करता रहा? चार सालो में क्या उसने कभी अपना सच्चा चेहरा उसे नहीं दिखाया? एक तरफ महिलायें अपनी बराबरी पुरुषों से करती हैं वही दूसरी तरफ वो ladies सीट भी मांगती हैं…. यह कहा तक न्यायसंगत है? मतलब तो यही हुआ की “चित भी अपनी पट भी अपनी” ….
जबकि जीवन की सच्चाई यह है की स्त्री और पुरुष एक दुसरे के पूरक हैं और यह बात हर रिश्ते पे लागू होती है! मुझे लगता है एक दुसरे को दोष देने के बजाय अगर सम्मान दिया जाए तो स्थिति बेहतर होगी!

हाँ एक बात मैं और कहना चाहूंगी मैं नियमित लेखिका नहीं हूँ यह मेरा पहला प्रयास है अपने विचारों को आप लोगों तक पहुंचाने का!

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 16, 2012

स्वागत है. नियमित रूप से समाज को मार्ग दर्शन दें. ये भी एक प्रकार की सेवा है. नमस्कार

    sadhna के द्वारा
    May 16, 2012

    जी शुक्रिया…..

Madhur Bhardwaj के द्वारा
April 10, 2012

भई वाह साधना जी, अत्यंत ही बेहतरीन आगमन….. आपने अपने पहले लेख से ही साबित कर दिया कि आप सच कहना जानती है! आपके लेख को पड़कर सिर्फ यही कह सकूँगा कि ——– गुजरी हुयी रात में लूटे गए आशियानों में एक आशियाना हमारा भी है, हाँ यह सच है कि हम लुटे हैं, मगर सच ये भी है “मधुर” कसूर हमारा भी है! हार्दिक बधाई एक बेहतरीन रचना के लिए!

    sadhna के द्वारा
    April 11, 2012

    Thanks a lot Madhur ji

    sadhna के द्वारा
    April 3, 2012

    what happened? ऐसा क्या लिख दिया मैंने? I have read both the posts.

    follyofawiseman के द्वारा
    April 4, 2012

    आप वाकई एक revolutionary लड़की हैं, आपके जैसी साहसी लड़की मैंने बहुत कम देखा है…..मैं आपका मुरीद हो गया हूँ….

    sadhna के द्वारा
    April 4, 2012

    Oh really!!!! Thankyou thankyou….. :)

RaJ के द्वारा
April 1, 2012

साधना जी आपका नज़रिया व्यापक और निष्पक्ष नज़र आया अक्सर होता ही यह की घटना और परिस्थिति का आकलन करने बजे लोग कोई एक लकीर स्त्री =पुरुष , हिन्दू = मुसलमान . , हिंदुस्तान = पाकिस्तान , धार्मिक=अधार्मिक जैसी खींचकर फिर वाद विवाद जैसा काम लेखक करने लगते है अब लेखक अपने को एक पार्टी बना लेता है समस्या से सरोकार कम पछ विपछ जैसा एक दुसरे को तोहमत लगाना ज्यादा हो जाता है आपका लेख छोटा पर विषय व् दिशा बड़ी माकूल है मेरे लेखन पर यदि फुर्सत मिले तो कुछ लिखें http://www.jrajeev.jagranjunction.com

    sadhna के द्वारा
    April 2, 2012

    शुक्रिया राज जी!

sonam के द्वारा
March 30, 2012

Welcome sadhna ji. जी हाँ आपकी बात कहीं न बिलकुल ठीक है कुछ समझदारी तो लडकियों को भी दिखानी चाहिए, ये नहीं की प्यार के चक्कर में सब कुछ ही भूल जाये!

    sadhna के द्वारा
    March 30, 2012

    Thankyou Sonam ji….

jagobhaijago के द्वारा
March 30, 2012

साधना जी मेरे विचार से दोषारोपण के पहले सम्यक विचार कर लेना चाहिए कि वस्तुसि्थति क्या है  दोषी दोनो में कोई भी हो सकता है…. ..जबकि जीवन की सच्चाई यह है की स्त्री और पुरुष एक दुसरे के पूरक हैं और यह बात हर रिश्ते पे लागू होती है!… बहुत अच्छी बात कही है आपने इसके लिए मंच पर स्वागत सहित शुभकामनाएँ  ।

    sadhna के द्वारा
    March 30, 2012

    जी बिलकुल ठीक कहा आपने “दोषारोपण के पहले सम्यक विचार कर लेना चाहिए कि वस्तुसि्थति क्या है” यही बात मैं कहना चाहती थी लेकिन इंसान अक्सर अपनों के मामले में biased हो जाता है!

vikramjitsingh के द्वारा
March 29, 2012

साधना जी, सादर, मंच पर आपका स्वागत है, आते ही आपने अच्छा विषय चुना है, शुभकामनाएं………

    sadhna के द्वारा
    March 30, 2012

    बहुत शुक्रिया!

dineshaastik के द्वारा
March 29, 2012

साधना जी मंच पर आपका स्वागत है। आपने जिस आलेख को पढ़कर  सारा दोष लड़की पर डाल दिया है। मेरे विचार से न्याय संगत नहीं है। क्योंकि बिना वस्तुस्थिति को समझे बिना, निर्णय करना, न्याय संगत नहीं है।  http://dineshaastik.jagranjunction.com/author/dineshaastik/

    sadhna के द्वारा
    March 30, 2012

    दिनेश जी मैंने दोष लड़की पर नहीं डाला… मैंने लड़कियों को भगवान् द्वारा दिए गए विशेष गुणों को बताने की कोशिश की है! I am quite surprised if any girl is not able to understand boy’s real nature.. and “4 yrs” is a long time to know anyone.

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 28, 2012

सत्य वचन. सार्थक,ज्ञानवर्धक एवं विचारणीय लेख. http://ajaydubeydeoria.jagranjunction.com

    sadhna के द्वारा
    March 30, 2012

    जी शुक्रिया!


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