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वाह री शराब!!!!

Posted On: 30 Mar, 2012 Others में

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अभी कुछ दिनों पहले की बात है हम दिल्ली से बनारस जा रहे थे… मेरे सामने वाली सीट पर दो लड़के बैठे थे दोनों को देखकर लग रहा था जैसे की आर्मी के हैं! थोड़ी देर बाद ट्रेन चलने लगी! उन दोनों में से एक ने अपनी वर्दी निकाल कर पहन ली, हमने सोचा वाह आर्मी के लोगों के साथ यात्रा करेंगे आज…. दरअसल मेरे मन में बहुत सम्मान है उनलोगों के लिए जो हमारे देश की और हम सब की रक्षा करते हैं…खैर….. उसके बाद उस आर्मी man ने एक ग्लास निकला… ट्रेन चलने से पहले ही उसके दोस्त ने एक कोल्ड ड्रिंक लाकर रख ली थी, तो मुझे लगा कि वाह कितने सलीके वाले होते हैं ये लोग! अगले ही पल उन महानुभाव ने एक बोतल निकाली शराब की…. और पीना शुरू किया…. एक ग्लास, दो ग्लास, तीन ग्लास और बोलना भी शुरू किया! अपने सहयात्री से पूछते हैं वो महाशय अंकल जी आप कहाँ जायेंगे? उन्होंने उत्तर दिया बनारस…. फिर थोड़ी देर उसने अपने मित्र से बात की उसको भी “पिलाने” की कोशिश की पर उसने मना कर दिया! फिर पूछा अंकल जी आप कहाँ जायेंगे अंकल जी ने उत्तर दिया बनारस! हमे थोड़ी हंसी आई पर मैंने रोका अपने आप को….. उस वक़्त बस यही चल रहा था मेरे दिमाग में कैसे ये हमारे देश की रक्षा करेंगे? कैसे हम इन पर भरोसा कर सकते हैं जो ट्रेन में, पब्लिक प्लेस में बैठ कर शराब पी रहा है वो कैसे किसी की रक्षा करेगा ??

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madhur Bhardwaj के द्वारा
April 11, 2012

साधना जी नमस्कार, मैं समझ सकता हूँ कि जब किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो बहुत दुःख होता है! मगर ऐसा नहीं है कि जैसा एक है वैसा दूसरा भी है, क्योकि आप भी जानती हैं कि हाथ कि पाँचों उंगलियाँ एक समान नहीं होती हैं ! और फिर ये दुनिया है! इसके खेल निराले हैं, निराश मत होइए बुरे हैं तो अच्छे भी हैं! अनुरोध करूँगा कि कभी समय निकलकर एक निगाह मेरे लेख पर भी डालियेगा! “सच तो यह है” के नाम से है!

    sadhna के द्वारा
    April 11, 2012

    मधुर जी आप ठीक कह रहे हैं जैसा एक है वैसा दूसरा नहीं होता लेकिन हमारे देश के रक्षक आम इंसान नहीं हैं एक इंसान की लापरवाही बहुत मुश्किल में डाल सकती है….

dineshaastik के द्वारा
April 1, 2012

साधना जी, सेना में अनुशासन तो सिखाया तो जाता है, किन्तु नैतिक शिक्षा का  अभाव रहता है। अतः इस तरह की घटना यत्र-तत्र देखने को मिल जाती हैं।

    sadhna के द्वारा
    April 2, 2012

    बिलकुल ठीक कहा आपने सर! मुझे लगता है अगर थोड़े पढ़े लिखे लोग आर्मी में जाए तो शायद उन्हें नैतिक शिक्षा भी मिल जाएगी…..

चन्दन राय के द्वारा
March 31, 2012

साधना जी , जनहित का सन्देश को मंच के माध्यम से अन्य लोगों तक पहुँचाने के लिए धन्यवाद. आपका अभिनन्दन http://chandanrai.jagranjunction.com/मेरे लहू का कतरा कतरा तिरंगा

    sadhna के द्वारा
    April 2, 2012

    चन्दन जी आपका बहुत शुक्रिया!


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