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My Father .....

Posted On: 9 Apr, 2012 Others में

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Dedicated to my Father…

मेरी ज़िन्दगी का वो पहला दिन,
जब मेरा जनम हुआ,
जब आपने मुझे गोद में लेकर मेरा माथा चूमा.
लेकिन मै रोने लगी, क्योंकि आपकी मूछे मुझे चुभ गयी,
धीरे धीरे मै बड़ी होने लगी!

आपका सिर्फ एक थप्पड़ मुझे याद है,
लेकिन उसके बाद आपका वो प्यार भी याद है,
भैया और राजू की लड़ाई में मुझसे गवाही लेना,
मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगता है,
कभी माँ की तरह परेशानियाँ पूछना,
भैया की तरह मार्गदर्शन करना,
राजू की तरह परेशान करना,
एक दोस्त की तरह बैठकर बाते करना.
और पिता की तरह जिम्मेदारियां निभाना…

मेरी छोटी सी सफलता पर आपका बहुत खुश होना,
हर रिजल्ट से पहले आपका उत्साह बढ़ाना,
और असफल होने पर भी उसको सफलता के नजरिये से दिखाना,
मुझे बहुत अच्छा लगता है!
कॉलेज आने पर आपका ट्रेन के साथ साथ चलना,
देर तक हाथ हिलाना,
मुझे बहुत अच्छा लगता है,इसीलिए मै सबसे ज्यादा भाग्यशाली हूँ,
क्योंकि आप मेरे पिता हैं……

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jyoti के द्वारा
May 5, 2012

वाकई पिता बरगद की वो छाव है जिनके आसपास हमे बहुत सुकून मिलता है , सुंदर रचना साधना .

    sadhna के द्वारा
    May 5, 2012

    शुक्रिया ज्योति जी….

Ritesh Chaudhary के द्वारा
April 13, 2012

कभी माँ की तरह परेशानियाँ पूछना, भैया की तरह मार्गदर्शन करना, राजू की तरह परेशान करना, एक दोस्त की तरह बैठकर बाते करना. और पिता की तरह जिम्मेदारियां निभाना… बहुत खूब प्रस्तुति

    sadhna के द्वारा
    April 14, 2012

    Thankyou so much Ritesh ji

Madhur Bhardwaj के द्वारा
April 10, 2012

साधना जी, नमस्कार, अत्यंत सुन्दर और भाव विभोर करने वाली कविता की रचना की है आपने! यक़ीनन आपके पिता इस कविता को पड़कर भाव विभोर हो उठे होंगे! पिता एक ऐसा रिश्ता जिसके बगैर दुनिया का हर रिश्ता अधूरा है, क्यूंकि पिता सिर्फ एक जन्मदाता ही नहीं अपितु – एक दोस्त, एक शिक्षक, एक सहयोगी, एक पथप्रदर्शक, धूप में छांव, गर्मी में शीतल हवा, बारिश में एक छाता, अँधेरे में रोशनी, सच कहूँ तो दुनिया में हर डर से निडर बनाने और हर मुसीबत का सामना करने का साहस या तो एक माँ देती है या फिर एक पिता! आपकी अपने पिता को समर्पित उत्तम कविता को बारम्बार हार्दिक बधाई!

    sadhna के द्वारा
    April 11, 2012

    Thankyou so much Madhur ji…

April 10, 2012

पिता को समर्पित रचना…….. भावनाओं की प्रधानता के कारण दिल को छू गयी……..हार्दिक आभार.

    sadhna के द्वारा
    April 11, 2012

    शुक्रिया अनिल जी…

Sumit के द्वारा
April 10, 2012

सुंदर रचना ….पिता का व्यक्तित्व शायद ऐसा ही होता है,,,,,मगर आप यदि राजू की जगह मित्र या कुछ और लिखती तो अच्छा लगता, क्युकी भाई और पिता ये तो समझ आता है , मगर राजू लिखने से ये नहीं पता चलता की ये राजू है कौन? http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/01/24/एक-अनोखा-पत्र/

    sadhna के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद सुमित जी, आप ठीक कह रहे हैं लेकिन ये मैंने उस वक़्त लिखी थी जब मैं अपने graduation के तीसरे वर्ष में थी… इसे लिखे हुए ६ वर्ष हो चुके हैं और मैंने ठीक वैसे ही यहाँ पर रख दिया बिना किसी बदलाव के…. राजू मेरा छोटा भाई है… :)

yogi sarswat के द्वारा
April 10, 2012

pita ko samarpit bahut behatreen rachna !

    sadhna के द्वारा
    April 10, 2012

    Thankyou sir!!!

pawansrivastava के द्वारा
April 10, 2012

साधना जी पापा पे तो कुछ भी कह दो कवीता है ..इसका श्रेय हमे नहीं जाता ,हमारे पापा को जाता है …वो होते ही इतने प्यारे हैं की उनके बारे में कहे शब्द खुद-ब-खुद अपनी काव्यात्मक कायिकाएं ढूंढ लेते हैं ….और वो ट्रेन वाली बात तो मेरे पापा पे भी लागू होती है

    sadhna के द्वारा
    April 10, 2012

    Absolutely Pawan ji,…

    sinsera के द्वारा
    April 10, 2012

    साधना जी नमस्कार, कल पवन श्रीवास्तव जी के ब्लॉग पर मैं ने अपने पापा को याद किया ..वहीँ के वहीँ दो मिनट में उन की कविता एडिट की . सौ बार पढ़ा और हज़ार बार रोई….. आप से अनुरोध है कि कृपया आप भी पढ़ लीजिये….लिंक नीचे दे रही हूँ… http://pawansrivastava.jagranjunction.com/2012/04/07/%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%B9/

    sadhna के द्वारा
    April 11, 2012

    Full of emotions mam…… honestly speaking i don’t want to think about this word “थे”…. life is very difficult widout parents whether you say it or not…

    sinsera के द्वारा
    April 11, 2012

    i am sorry sadhna ji not to control my senses on ur blog.realized afterwards, i should not have done it.may god never let u think about the word “थे “….. u wrote very beautifully….

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 9, 2012

सुन्दर कविता.बधाई !

    sadhna के द्वारा
    April 10, 2012

    शुक्रिया राजीव जी….

चन्दन राय के द्वारा
April 9, 2012

साधना जी , मात पिता पर कुछ भी लिखा जाये वो सब्द भाव मेरे लिए ही नहीं सभी के लिए बहुमूल्य है

    sadhna के द्वारा
    April 10, 2012

    बिल्कुल ठीक कहा आपने चन्दन जी….

ashishgonda के द्वारा
April 9, 2012

बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ, और बहुत सुन्दर प्रसंग,,,,, इसी तरह मैंने भी माता-पिता के चरणों में समर्पित दो कवितायेँ लिखी है अगर आपको समय मिले तो जरूर पढियेगा http://ashishgonda.jagranjunction.com/ (१) सच्चा ईश्वर (२) सच्चा ईश्वर भाग- 2

    sadhna के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद आशीष जी, जी बिलकुल पढेंगे आपकी रचनाएं!


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