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पहली मुलाकात.....

Posted On: 16 Apr, 2012 Others में

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थोड़ी घबराहट सी
थोड़ी गुदगुदाहट सी
दिल में थी
जब मैं पहली बार तुमसे मिली

सोचा था ये पूछेंगे
ये बात करेंगे
लेकिन ये क्या हुआ
सब कुछ भूल गयी

क्या दिलकश अंदाज़ था
तुम्हारे बात करने का
बैठने का, चलने का
और बीच बीच में मुझे देखने का

तुम्हारी हंसी
मेरे दिल के तारो को झंकृत कर रही थी
तुम्हारी मुस्कान
मेरी आँखों की चमक बन रही थी

तुम्हे याद है न
मैं किस तरह एकटक तुम्हे देखे ही जा रही थी
वो इसलिए कि मैं
हर एक लम्हा कैद करना चाहती थी

मैं चाहती थी कि
तुम्हारे जाने के बाद
जब भी मैं अपनी आँखें
बंद करू तो
तुम्हारा हँसता हुआ
मुस्कराता हुआ चेहरा नज़र आये

सोच रही थी ये शाम,
यह वक़्त यही ठहर जाए
थोड़ा मन उदास था
ख़ुशी और गम का साथ था

एक बार फिर बेचैनी थी
तुम्हे जी भरकर देख लेना
चाहती थी
रोक लेना चाहती थी

हमारे दूर जाने का समय
नज़दीक था, फिर
एक पल में ही गायब हो गए
एक सपने कि तरह
क्या यह सपना था मेरा…
नहीं, सच ही तो था

आये तो थे तुम
मुझसे मिलने!!

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 2, 2012

काफी पहले कुछ लिखा था, आज आपकी रचना पढ़ते हुए याद आ गया… अक्सर याद आती हैं, वो चंद मुलाकातें, वो खुशबू जैसे लहजे, वो फूलों जैसी बातें मीठे मीठे पल, और प्यार में घुली ढेरों हिदायतें…

    sadhna के द्वारा
    May 2, 2012

    बहुत खूब अभिनव जी….. :)

mayankkumar के द्वारा
April 28, 2012

श्रंगार व करूण रस में आपने जिस तरह अपने काव्य में पिरोया है उससे वाकई आपके दिल की नमी झलकती है ………….. बेहद भावविहंगम रचना …………….

    sadhna के द्वारा
    May 2, 2012

    Thank you Mayank ji…. :)

Mohinder Kumar के द्वारा
April 25, 2012

प्रेम, मिलन व बिछोड के भाव बांधे सुन्दर रचना. इसे पढ कर ये शेर याद आ गये. तुम आ गये सामने तो आता नहीं है याद वरना मुझे आप से कुछ कहना जरूर था न जी भर के देखा न कुछ बात की बडी आरजू थी तुमसे मुलाकात की

    sadhna के द्वारा
    April 25, 2012

    बहुत खूब मोहिंदर जी….. :)

follyofawiseman के द्वारा
April 18, 2012

मैंने सुना है ”that which cannot be said, should not be said….” but कोशिश करने मे क्या हर्ज़ है…..let me say something…… (15 मिनट बीत चुका)…….(………………………………………………………………) (…………………………..) I am really sorry I cannot say anything……! ……………………………………………………(It’s impossible to comment……) (………………………………………………..) ……………………………………………..!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!॥

    sadhna के द्वारा
    April 19, 2012

    Thank you so much Mr. Sandeep ….. for spending more than 15 minutes on my post… आजकल मैं silence भी समझने लगी हूँ…. so i can understand your Silence…. :)

sinsera के द्वारा
April 17, 2012

साधना जी नमस्कार, एक मासूम लड़की की भोली भाली बातों का आप ने बड़ी जीवन्तता के साथ वर्णन किया है. ऐसा ही होता है. मुलाकात का वक़्त जल्दी ख़त्म हो जाता है फिर तो बस बंद आँखों से दीदार करिए… एक बात समझ में नहीं आई…साइंस के मुताबिक किसी चीज़ का चित्र रेटिना (आंख के परदे ) पर सिर्फ 1 /6 सेकेण्ड तक ही रहता है…तब आप आंखें बंद कर के “उसे ” बार बार कैसे देखतीं???? (just kidding…dont mind plz…:-))

    sadhna के द्वारा
    April 18, 2012

    Thankyou Sarita ji…… सरिता जी इश्क है ही ऐसी चीज़ जिसके आगे मेडिकल science भी फेल हो जाती है…. और इश्क हो जाने के बाद अगर आँखें ना भी रहे तो भी “वो” दिखता है.. फिर क्या रेटिना क्या आँखे…. :)

dineshaastik के द्वारा
April 17, 2012

साधना जी कमाल  की अभिव्यक्ति, शब्दों से आपने एक  चित्र  सा खींच  दिया। सराहनीय  भाव प्रधान  रचना, बधाई…

    sadhna के द्वारा
    April 17, 2012

    शुक्रिया दिनेश जी!

RAHUL YADAV के द्वारा
April 16, 2012

साधना जी , पहली मुलाकात को आपने सुंदर शब्दों से सजाया।

    sadhna के द्वारा
    April 17, 2012

    Thankyou Rahul ji…

pawansrivastava के द्वारा
April 16, 2012

साधना जी अब क्या कहूं …. सुब्हान रबियन आला ! ……आपकी कविता इतनी जीवंत है कि ऐसा लगता है कि मैं आपके प्यार के बगिया का वो गुलफाम हूँ जिसके सामने आपके इस कविता की बीज बोई गयी है …….ऐसा लगता है जैसे आप वाकई एक पुरकशिश इंतजार के बाद अपने चाहने वाले एक अल्हड़ अलमस्त से लड़के से PVR के पास कहीं किसी काफी हाउस में मिली हैं और फिर coffee की चुस्कियों के साथ रफ्ता रफ्ता उसके गहरी आँखों के प्याले में भरकर प्यार की पुरनम चांदनी घुट घुट पीती रही हैं और फिर वो लड़का आपको वायदे और दिलासों की मीठी टीस दिए आपसे दूर चला गया है …..और उसकी जुदाई में,शबे फुरकत में आपकी आँखों से अश्कों की चंद बूंदे लुढ़ककर पन्नो पे पड़ती है और कविता बन जाती है….अगर ऐसा कुछ हुआ है तो आपसे यही कहूँगा कि इतिहास गवाह है कि प्यार की मुकम्माली ,उसकी पोशीदगी विसाल से ज्यादा हिज्र में होती है…सच्चे आशिक कभी नहीं मिलते .

    sadhna के द्वारा
    April 17, 2012

    पवन जी मुझे अपनी कविता से ज्यादा आनंद आपका कमेन्ट पढने में आया… and trust me i was smiling all the time… क्या लिखते हैं आप…. ऐसा कमेन्ट देकर आपने मेरी कविता को और जीवंत बना दिया है! अब क्या कहूँ ये तो मेरी भावनाएं हैं उस अल्हड़ अलमस्त लड़के का पता नहीं….

    pawansrivastava के द्वारा
    April 17, 2012

    आपकी कविता मासूम ,मुक़द्दस ,मुहब्बत भरी और इस कविता का अल्हड अलमस्त लड़का करोड़ों में एक और आप …गंगा अगर महान है तो सोंचिये गंगोत्री कैसी होगी ? :) :)

    sadhna के द्वारा
    April 17, 2012

    :) :) :)

MAHIMA SHREE के द्वारा
April 16, 2012

साधना जी नमस्कार लगा जैसे हमसे बाते कर रही है ..दिल की बातें बिलकुल दिल से ….. प्यारी प्रस्तुति…

    sadhna के द्वारा
    April 16, 2012

    your most welcome Mahima ji….. thanks alot!

vikramjitsingh के द्वारा
April 16, 2012

वाह साधना जी वाह…..!!!!! ”बात भी आपके आगे मुंह से न निकली, लीजिये क्या लाये थे हम, सोच-साच के…..”

    sadhna के द्वारा
    April 17, 2012

    शुक्रिया विक्रम जी


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