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We are always connected to God .....

Posted On: 19 Apr, 2012 Others में

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हर किसी को मैंने सुना है ये पूछते हुए कि क्या भगवान् है….? क्या वह हमारी प्रार्थनाएं सुनता है…? मैं कहूँगी हाँ है और हमारी हर एक बात उस तक पहुँचती है…. आपको एक वाकया सुनती हूँ…. मैं अपने इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष में थी.. हम लोगों के लिए fresher party organise की गयी… उसमे कुछ cultural programs भी होने थे…. पहले तो मैं ज़रा भी interested नहीं थी उस कार्यक्रम का हिस्सा बनने में लेकिन पार्टी के ठीक ३-४ दिन पहले एक senior आई मेरे पास उन्होंने कहा साधना तुम्हे कोई सरस्वती वंदना आती है…? मैंने कहा हाँ (as i am a big fan of maa शारदा…… :) ) यहाँ तक भी मैंने कुछ नहीं सोचा था और मैंने उन्हें एक सरस्वती वंदना लिख कर दे दी! कुछ समय बाद वो फिर मेरे पास आई और बोली तुम सरस्वती वंदना गाओगी..? मैंने पूछ और कौन कौन है इसमें…. उन्होंने बताया ४ लोग और हैं…. मैंने कहा ठीक है…. अब हम लोगो ने साथ में थोड़ी rehearsal की…. जिस क्रम में हमे खड़ा होने को कहा गया था उसमे मुझे सबसे बाद में stage पर जाना था अब यहाँ पर मैंने सोचा काश stage पर सबसे पहले मै जाऊं…. फिर इस ख्याल को दिमाग के कोने में कही रख दिया….. अब दिन था fresher पार्टी celebrate करने का….. हम लोगो का नाम announce किया गया सरस्वती वंदना के लिए….. पांचो लडकिया पहुंची stage के पास….. जिस क्रम में announcement हुआ था अब हमे उसी क्रम में stage पर जाना था…… now guess what …….? मैं पहली लड़की थी stage पर जाने वाली….. मन ही मन मैंने शुक्रिया अदा किया माँ का और सरस्वती वंदना गाई…. !!!

ये तो था माँ का प्यार अब सुनिए बाबा का प्यार….

अब मैं दूसरे वर्ष में थी लेकिन अपने घर कानपुर में ……. गर्मियों का मौसम था….. मैं छत पर अकेली बैठी थी घर के मोबाइल साथ में लेकर…. माँ kitchen में थी और पिताजी शाम की पूजा कर रहे थे! यही कोई 8 बज रहा होगा उस वक़्त !! घर में धार्मिक माहौल होने की वजह से मन में ईश्वरके लिए आस्था हमेशा ही रही है! और शिव जी से मुझे कुछ ज्यादा ही प्रेम है सो मैं आंखे बंद कर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने लगी फ़ोन को अपने साइड में रख कर…… काफी देर तक बोलती रही फिर आँखे बंद रखते हुए ही साइड में फ़ोन खोजने लगी…. थोडा हाँथ दूर दूर तक किया पर शायद अंदाजा नहीं लगा की कहा रखा था तो वो नहीं मिला…. आखिर में मुझे आँखे खोलनी ही पड़ी….. मैंने देखा…. मुझसे १० इंच की दूरी पर करीब २ फीट का सांप बैठा हुआ था (जानकारी के लिए बता दूं छत पर कही ऐसा कुछ नहीं था जहाँ वो छुप कर बैठ सके) मैं चौंक कर उठी…. बड़ी जोर से चिल्लाई…. फिर तो वो चला ही गया….. मैं सोच रही थी ये क्या हुआ….. आज तक समझ नहीं आया…..

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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RaJ के द्वारा
April 22, 2012

विश्वास मन की शक्ति को जगाता है पर यह मान लेना कि ईश्वरीय शक्तिं इस ब्रहमांड में आकर कोई कम कर सकती है यह निरर्थक है | इश्वर यदि ऐसी शक्ति के साथ प्रथ्वी पर होता तो उन करोनो लोगों जोकि यदि आपकी द्रष्टि से मना जाये तो उसकी संताने ही है को भूखा नंगा बिलखता देखता रहता | आस्था अपने में बड़ी चीज़ जो संबल देती है ऐसा तो संभव है कि आप अपने ध्येय को सतुत्ति करें तो वो आपको वह सहक्ति दे कि आप निडर Exam में बैठें और भुत अच्छा परिणाम भी आये | पर आप कहें कि पेपर भी भगवान ने solve कर दिया तो यह आपका अन्ध्विशस है | बहुत से लोग कह सकते उन्होंने भगवान के दर्शन किये पर यह सब अत्यधिक सोचने के कारन हुए मष्तिष्क के जैव रसायन परिवर्तन है जो कभी ऐसे अक्स दिखाई देते है जो मोजूद नहीं होते | आस्था को चमत्कार के रूप में बदलने में देर नहीं लगती साधना जी आप जैसे तकनिकी छात्रा को अपने तार्किक दिमाग पर पूरा विश्वास होना चाहिए व इश्वर कि परिकल्पना एक अपनी आत्मा को परमार्जित करने वाले source ki tarah karni चाहिए न कि किसी सांसारिक कम को बनवाने के लिए एक अलोकिक शक्ति के रूप में . आपको यह विचार में hurt करने के लिए नहीं लिख रहा वरन जीवन के दर्शन के उस पहलु को बताने जिसे बहुत मंथन से में सीख पाया हूँ

    sadhna के द्वारा
    April 23, 2012

    राज जी, दो लोग होते हैं दोनों अलग तरीके से सोचते हैं…. दोनों एक ही चीज़ को अलग तरीके से देखते हैं लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है की उनमे से कोई एक गलत है…. मुझे आपके विचार ने ज़रा भी hurt नहीं किया… मुझे कभी ईश्वर नहीं दिखा लेकिन मेरी उसमे आस्था है…. बहुत सारी बाते मेरे साथ अच्छी हुई हैं जिनमे मेरे साथ कोई और invovle नहीं रहा…. बस मैं उन सबका श्रेय खुद को नहीं देना चाहती…. ( कही दिमाग खराब ना हो जाए :) ) और हाँ कुछ बुरा होने पर मैं ईश्वर को दोष भी नहीं देती…

    dineshaastik के द्वारा
    April 26, 2012

    आदरणीय  राज  जी, आपकी बातों से पूर्णतया सहमत। आदरणीया साधना जी, ईश्वर है इसमें कोई संदेह नहीं है। किन्तु वैसा नहीं जैसा हमने बना रखा है। वह  विशाल  से भी विशाल है कि उसकी प्रतिमा बनाई नहीं जा सकती। वह सूक्ष्म से भी सूक्ष्म है कि उसे किसी तरह नहीं देखा जा सकता है। वह सर्वशक्तिमान है किन्तु अपने जैसा दूसरा भी नहीं बना  सकता है। वह न्यायकारी है। किन्तु वह न तो क्षमा करता है  न क्रोधित होता है और न ही किसी पर खुश। क्योंकि ऐसा  करने से उसका न्याय के सिद्धांत  तिरोहित होता है। ईश्वर  द्वारा रचित  प्रथम  और संभवतः अंतिम  रचना वेद में यह वर्णित  है। अन्य मानवकृत रचनाओं ने ईश्वर के संबंध  में भ्रम  पैदा किया है।

abhii के द्वारा
April 20, 2012

interesting…..

    sadhna के द्वारा
    April 21, 2012

    Thanks!! :)

sinsera के द्वारा
April 20, 2012

साधना जी नमस्कार, मैं अपनी उत्सुकता न छुपा सकने के लिए माफ़ी चाहती हूँ…. ये तो बहुत थोड़े से वाकये हैं. जब कभी खुदा, जीसस, वाहे गुरु और बाकि सब देवी देवताओं की कृपा का भी अनुभव हो तो कृपया हमारे साथ शेयर ज़रूर करिए गा….w8ing…………

    sadhna के द्वारा
    April 20, 2012

    सरिता जी, ईश्वर की कृपा होगी तो वो ज़रूर अपने सानिध्य में लेंगे… और सारे अनुभव भी कराएँगे….. :)

चन्दन राय के द्वारा
April 20, 2012

साधना जी, आपका अनुभव और कितने सामाजिक प्रकरण उठा के देख लिजिय , इश्वर की हर घडी हम पर नजर और मेहर होती है

    sadhna के द्वारा
    April 20, 2012

    जी हाँ चन्दन जी, ईश्वर की दया दृष्टि तो मैंने बहुत नज़दीक से देखी है!

pawansrivastava के द्वारा
April 19, 2012

साधना जी विश्वास के नाव पे बैठकर विकट से विकट सागर को पार किया जा सकता है

    April 20, 2012

    जी, साधना जी आप साप को हिंसक ही क्यों मानती हैं. एक बात जान लीजिये कि कोई कितना भी विषैला जिव क्यों न हो? बिना कुछ किये किसी को हानि नहीं पहुचाता. आपके साथ एक वकवा हुआ और मेरे साथ ऐसे चार-पञ्च वाकया हो चुके हैं. मेरे सामने से सांप और बिच्छी निकल गए हैं पर मैं थोडा भी विचलित नहीं हुआ. न मुझको वह हनी पहुचाया और न मैंने उसको. यदि आप को ईश्वर में सच्चा विश्वास है तो आपको तो डरना ही नहीं चाहिए. क्योंकि जो ईश्वर हैं वो स्वार्थ और मनोकामनाओं से बहुत दूर हैं. वह हम स्वार्थी इंसान हैं जो उसे इसमें बांधे रखते हैं. जिसकी आप बात कर रही है उसे अन्धविश्वास कहते है. वैसे छोडिये यह विषय चिंतन और मनन का हैं न कि अन्धविश्वास और दर पैदा करने का. कृपया आप मेरा नंगा नाच देखे और हमेशा खुश रहें…. http://merisada.jagranjunction.com/2012/04/15/%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8-2/

    sadhna के द्वारा
    April 20, 2012

    जी पवन जी, बिलकुल ठीक कहा आपने…. pawan ji aapne jo comment kiya tha meri kavita pe uska ek ek word sahi ho raha hai….. :(

    sadhna के द्वारा
    April 20, 2012

    शुक्रिया अनिल जी

MAHIMA SHREE के द्वारा
April 19, 2012

प्रिय साधना जी , नमस्कार आपने अपने ईश्वरीय आस्था के प्रत्यक्ष अनुभव को बाटा अच्छा लगा ….. बहुत कम लोगो एहसास कर पाते है या इस तरह की घटना से रूबरू हो पाते है इस लिए …आप अपने आस्था बनाये रखे … बहुत-२ बधाई आपको

    sadhna के द्वारा
    April 20, 2012

    धन्यवाद महिमा जी…. :)

April 19, 2012

आदरणीया साधना जी, God is not a grocery item to purchase from any shop. One who does not believe in God is no doubt a wretched one. Here I quote a line from the blog of respected Pundit R. K. Rai Errors like straws upon the surface flow. One who is in search of truth must dive below. Thank you.

    April 19, 2012

    You will please excuse me for using the word”respected” for myself.

    April 19, 2012

    आदरणीय गुरुवार राय जी यदि आप अपनी अभिव्यक्ति हिंदी में दें तों हमारे ऊपर बहुत कृपा होगी. और साधना जी, बहुत लोग तों अपने मान बाप तक को नहीं मानते है. जो नहीं मानते है. वे न माने. ऐसे लोगो के बारे में क्या कहा जा सकता है?

    sadhna के द्वारा
    April 20, 2012

    Absolutely Rai sahab ji… On “Respected” word i would say if i will not respect myself then i can not expect other person to respect me…. so it is very much ok… :)

mayankkumar के द्वारा
April 19, 2012

आपने ईश्वर की कृपा के कई अतुल्य उदाहरण देखे जिससे आप के मन-मंदिर में श्रद्धा और विष्वास की दीप जल उठा है ……. प्रार्थना जारी रखिए … साधना जी …..

    sadhna के द्वारा
    April 20, 2012

    Thank you Mayank ji


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