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ईश्वर भी 'आह' भरता होगा......

Posted On: 5 May, 2012 Others में

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कैसी है ये अफरा तफरी,
क्यों मचा है इतना शोर,
क्या घटी है कोई दुर्घटना,
या पकड़ा गया है कोई चोर,
मानवता की हुई है हत्या,
प्रेम की दी जाएगी बलि,
मै हूँ नफरत का देवता,
ये सब हैं मेरे अनुयायी,
मै हूँ समाज का ठेकेदार,
ये है मेरा साम्राज्य,
नहीं पनपने दूंगा मै प्रेम यहाँ,
ये सब हैं मुझसे भयभीत,
कोई नहीं कर सकता मेरा विरोध,
मै हूँ नफरत का देवता,
तू प्रेम फैलाने आया है,
कुचल कर रख दिया जायेगा,
तू यहाँ नहीं टिक पायेगा,
तू देख यहाँ का मंजर,
कोई दिखता है हिम्मतवाला……
हा हा हा हा हा हा हा
मै हूँ नफरत का देवता,
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हे महापुरुष , क्यों बनता है तू अज्ञानी,
प्रेम की खुशबु तेरे पास नहीं आनी,
तू नफरत का देवता,
मै हूँ प्रेम का पुजारी,
ये नफरत ही तो है तेरी लाचारी,
भाग जाएगी तेरी कायरों की सेना,
ना रहेगा तेरा साम्राज्य
ना होगा यहाँ अन्धकार,
प्रेम की शक्ति से तू नहीं है वाकिफ,
हटा दे ये नफरत का पर्दा,
मै प्रेममय हूँ, प्रेम ही बांटूंगा,
खोल अपनी ज्ञानेन्द्रियों को,
पहचान इसे,
प्रेम बिन संभव नहीं जीवन,
त्याग दे ये नफरत,
बन जा प्रेम का पुजारी,
ले सीख तू मुझसे,
त्याग दे ये नफरत,
बनता है तू समाज का ठेकेदार,
तो फैला अच्छाई को,
पहचान सच्चाई को,
झूठ अहंकार से कुछ ना पायेगा,
अपने साथ सिर्फ ये प्रेम ही ले जायेगा!!

Paulo Coelho ne apni ek book me kaha hai “Love is an untamed force,when we try to control it, it destroys us. When we try to imprison it, it enslaves us. When we try to understand it, it leaves us feeling lost and confused.”

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 3, 2012

साधना जी, उत्तम रचना के लिए धन्यबाद.. प्रेम मैं अनंत शक्ति है, ये व्यक्ति पर निर्भर करता है की वह इसे सृजन के लिए काम लता है या विध्वंस के लिए ..हाँ सच कह रहा हूँ, प्रेम विध्वंसक भी हो सकता है…क्यूंकि ये एक उर्जा है और उर्जा उसी तरह परिणाम देती है जैसे इसका प्रयोग किया जाये… प्रेम अपने आप मैं इतना महँ, विशाल, अपरिमित और असीमित है की इसकी व्याख्या नहीं की जा सकती, सिर्फ अनुभूत किया जा सकता है…. पुन: धन्यबाद…

    sadhna srivastava के द्वारा
    October 12, 2012

    I Completely agree with you Himanshu ji…

dineshaastik के द्वारा
May 8, 2012

आदरणीय साधना जी, प्रेम  कभी मरता नहीं है, नफरत  कभी देवता नहीं बन  सकता, प्रेम  तो सृष्टि का मूलाधार है, बिना प्रेम  के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रेम  और नफरत एक  दूसरे के सहोदर हैं, किन्तु एक  दूसरे के पूर्णतः विपरीत।

yogi sarswat के द्वारा
May 7, 2012

ले सीख तू मुझसे, त्याग दे ये नफरत, बनता है तू समाज का ठेकेदार, तो फैला अच्छाई को, पहचान सच्चाई को, झूठ अहंकार से कुछ ना पायेगा, अपने साथ सिर्फ ये प्रेम ही ले जायेगा!! बहुत सुन्दर शब्द !

चन्दन राय के द्वारा
May 6, 2012

Dear Sadhna ji, What a beautiful thought you have about love , every word is so expressing , In my point of view “Unless it is extraordinary, madness love , all you are doing is waisting your time , and if you got that love , never leave that love , once again congrates for such a beautiful poem

D33P के द्वारा
May 6, 2012

झूठ अहंकार से कुछ ना पायेगा, अपने साथ सिर्फ ये प्रेम ही ले जायेगा!!


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