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मेरी माँ, तेरी माँ.....

Posted On: 12 May, 2012 Others में

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मुझे लड़कियों की एक बात बहुत पसंद आती है वह जिससे चाहे अपने मन का काम करवाने में सक्षम होती हैं… प्यार से समझा कर, डांट कर, गुस्सा दिखा कर और अगर इन सबसे भी बात न बने तो अपना ब्रम्हास्त्र छोड़ देती हैं….. मतलब अपने बेशकीमती मोती जैसे आंसू गिराकर… :)
हर किसी ने “अपनी अपनी माँ” के लिए बहुत अच्छा अच्छा लिखा और कोई क्यों न लिखे माँ होती ही ऐसी है… लगभग अपनी चौथाई उम्र हम सब माँ के साथ ही तो बिताते हैं और अब तो इतना भी नहीं होता बच्चा 16 – 17 साल का हुआ नहीं कि कही और भेज दिया जाता है पढने के लिए…. और जब वो माँ हमसे दूर होती है तब वो हमे और भी ज्यादा प्यारी लगने लगती है! शायद यही मनुष्य का स्वभाव है जो है हमारे पास हम उसकी परवाह नहीं करते और जो नहीं है उसके लिए रोते रहते हैं…… योगेश जी ने कही कही बड़ा सटीक प्रश्न पूछा है…. भारत में माताओ की हालत इतनी ख़राब क्यों है..जबकि हर कोई अपि माँ को इतना ज्यादा प्यार करता है….? योगेश जी मैं बताती हूँ…. क्यों कि हर कोई अपनी माँ को इतना ज्यादा प्यार करता है…. एक लड़की जब विदा होकर अपने ससुराल जाती है तो वहां उसे एक और माँ मिलती है अब फिर से यहाँ वही बात आती है की जो पास है वो ख़ास नहीं और जो ख़ास है वो पास नहीं…. यही सबसे बड़ा कारण है कि भारत माता के देश में माताएं दुखी रहती हैं….. !! कही पर भी किसी ने ये नहीं लिखा कि “माँ तूने मुझे इतना डांटा मुझे भला बुरा कहा फिर भी मै तुझसे प्यार करता रहा/ करती रही” हम सब बड़े गर्व से कहते हैं न कि कानून ये कहता है कानून वो कहता है (जब बात अपने मतलब कि होती है तब) फिर इस कानूनी माँ( mother -in -law ) से इतना दूर क्यों भागते हैं…. अपनी माँ के कुछ भी बोलने पर हम कहते हैं ये उनका अधिकार है लेकिन इन क़ानूनी माँ के कुछ कहने पर वो “सास” बन जाती हैं! मैं यहाँ पर सिर्फ लड़कियों की बात नहीं कर रही हूँ लड़के भी ऐसा ही करते हैं कितनी उम्मीदे रखते हैं वो अपनी “सास” से….. उनके लिए तो शायद उनकी पत्नी की माँ का कोई आस्तित्व ही नहीं होता…. इसीलिए “माँ” परेशान रहती है…. !!

मैंने सबसे पहले ब्रम्हास्त्र की बात इसलिए लिखी है कि कुछ समय बाद ये ब्रम्हास्त्र ओजहीन हो जाता है जब एक बेटे को अपनी माँ के आंसू नहीं दिखते…. और एक बेटी जो इन्ही आंसुओ का प्रयोग न जाने कहाँ कहाँ करती है, वो भी नहीं देखना चाहती….!!

“मेरी दादी माँ को कैंसर था मेरी माँ ने उनकी खूब सेवा की… हम सबको कानपुर में छोड़ कर वो गाँव दादी के साथ ही चली गयी क्योंकि दादी गाँव में रहना चाहती थी…. जब उनका अंतिम समय नज़दीक था तो वो किसी को पहचान नहीं रही थी हर कोई उनके पास जा कर पूछ रहा था अम्मा बताओ हम कौन हैं…. लेकिन अम्मा सबको भूल चुकी थी यहाँ तक की अपने पति, बेटे और बेटियों को भी…. जब मेरी माँ उनके पास गयीं तो दादी ने कहा तुम मेरे लाला की बहू हो….” शायद इसलिए कि पूरी लाइफ मेरी माँ ने अपनी क़ानूनी माँ को बहुत प्यार किया और लास्ट stage तक करती रहीं!!

mother-8

माँ मैं क्या कहूं
मेरे पास देने को तो
कुछ भी नहीं है
मुझे अपने जैसा बना दो बस
ताकि मैं तेरा नाम
रोशन करू
एक और माँ के पास जाकर!!
bride

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41 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

panditsameerkhan के द्वारा
May 19, 2012

साधना जी आपकी बातें दिल को छू गयी…आपकी माँ को मेरा प्रणाम….

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 24, 2012

    शुक्रिया समीर खान जी…… :)

pawansrivastava के द्वारा
May 17, 2012

साधना मेरे साथ भी कुछ ऐसा हीं हुआ ,जब मैंने अपनी प्रेमिका के परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ अपनी प्रेमिका से कोर्ट में शादी कर ली तो उन सबों ने मुझसे और मेरी पत्नी से नाता तोड़ लिया पर माँ(मेरी सास ) का दिल देखो ,उन्होएँ मुझे माफ़ कर दिया …अपने बेटों ,बहुओं से छुप कर हमसे मिलती रही ,अपना आशीष और दुलार हमपे वारतीं रहीं और २ साल पहले अपने आखिरी वक़्त में न बोल सकने की स्थिति में इशारों इशारों से मुझसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर की ….मैं गया तो वो जो इतनी निशक्त हो गयी थी की न बोल पाती थीं और न हीं कुछ हरकत कर पातीं थीं …पर उनकी ममता देखो ,उन्होंने मुझे न केवल मेरा नाम लेकर पुकारा ,बल्कि अपना पूरा बल बटोर कर उन्होंने मेरे सर पे हाथ रक्खा …आज तुम्हारे इस भावनात्मक लेख ने उनकी याद फिर ताजा कर दी ….RATING -5/5

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 18, 2012

    So interesting!!! :) :) कभी पूरी love story सुनाइएगा… :) Thanks a lot Dada….

Santosh Kumar के द्वारा
May 16, 2012

बहुत अच्छी पोस्ट साधना बहन !…माँ की रचनाओं में आपकी पहली रचना देखि है जिसने कानूनी माँ को न सिर्फ याद किया है बल्कि खूबसूरत सन्देश भी दिया है …हार्दिक आभार आपका

    sadhna के द्वारा
    May 17, 2012

    Thankyou so much…

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 16, 2012

बहुत sundar भाव पूर्ण प्रस्तुति, बधाई.

    sadhna के द्वारा
    May 16, 2012

    Thankyou Sir….. :)

D33P के द्वारा
May 15, 2012

जागो साधना जी जागो

    sadhna के द्वारा
    May 16, 2012

    :) :) :)

dineshaastik के द्वारा
May 14, 2012

आदरणीय साधना जी, नमस्कार, बहुत सुन्दर  विचार, माँ के प्रति आपके भावों को नमन। माँ के संबंध में मेरा मानना है कि यदि कहीं कोई खुदा है, तो वह केवल माँ है। माँ के अतिरिक्त और कुछ नहीं।

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    शुक्रिया दिनेश जी…..

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 13, 2012

साधना जी, सादर- माँ तो बस माँ है. इसके सामने बाकी सब रिश्ते फीके है. और फिर अपनी अपनी समझ की बात है. सुन्दर आलेख और भावात्मक पंक्तिओं के लिए बधाई……………….

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    शुक्रिया हनीफ जी, बिल्कुल ठीक कहा आपने अपनी अपनी समझ की ही बात होती है…..

satish3840 के द्वारा
May 13, 2012

नमस्कार साधना जी / मेने पवन जी की टिप्पणी में कभी कभी आपको नोटिश किया पर आज ब्लॉग पर पहली बार आया / इससे पहले एक ब्लॉग और पढ़ा / पहले तो आपको खोजने में बड़ा वक्त लगा कारण पवन लेप टॉप वाले सूफी जी ने शायद अपना ब्लॉग डिलीट कर दिया हें / आपकी स्पस्ट बातें वास्तव में एक दम सच्चाई के करीब हें / जेसे आपने अपनी दादी के बारे में बताया / ये बात सही हें कि माँ को सभी प्यार करते हें पर कानूनी माँ ( सास ) में कुत्ते बिल्ली जैसा बर्ताव क्यूँ हें / समझ से परे हें / आपकी पोस्ट पर पहली टिप्पणी हें / ज्यादा के क्षमा

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    आपका स्वागत है सतीश जी, :) पवन जी ने अपना ब्लॉग डिलीट नहीं किया है….. हम उन्हें ऐसा करने भी नहीं देंगे…. आपका कमेन्ट मेल में पढने के बाद सबसे पहले मैंने पवन जी को खोजा…. वो यहीं हैं अगर वो यहाँ से चले गए तो जागरण junction उनकी कमी को कभी पूरा नहीं कर पायेगा!!

mparveen के द्वारा
May 13, 2012

माँ मैं क्या कहूं मेरे पास देने को तो कुछ भी नहीं है मुझे अपने जैसा बना दो बस ताकि मैं तेरा नाम रोशन करू एक और माँ के पास जाकर!! बहुत सुंदर पंक्तियाँ…..

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    शुक्रिया परवीन जी….

follyofawiseman के द्वारा
May 13, 2012

ग़ालिब छुटी शराब पर अब भी कभी कभी, पीता हूं रोज़-ए अब्‌र-ओ-शब-ए माह्‌ताब में……..! अच्छी बकवास  है,,,,,पर बस इतना ख़याल रहे की कोई समझ न ले…………..! कब से हूं क्‌या बताऊं जहान-ए ख़राब में शबहा-ए हिज्‌र को भी रखूं गर हिसाब में………….! 

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    लगता है आज फिर से ज्यादा पी ली है…..

    follyofawiseman के द्वारा
    May 14, 2012

    :) बादलों से सलाम लेता हूँ वक्त क़े हाथ थाम लेता हूँ सारा मैख़ाना झूम उठता है जब मैं हाथों में जाम लेता हूँ

Piyush Kumar Pant के द्वारा
May 12, 2012

सब धरती कागज करू , लेखनी सब बन राय…. सात समुद की मसि करू , माता गुन लिखा ना जाय… माँ के जीवन मे केवल एक ही दिन ऐसा होता है की जब औलाद रोती है……….. और माँ हँसती है और वो दिन वो होता है जब वो औलाद माँ के गर्भ से इस धरा पर जन्मती है….. तब बच्चा रो रहा होता है और माँ उसके सुरक्षित जन्म पर खुश होती है……….

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    You are most welcome on my blog!! :)

Sumit के द्वारा
May 12, 2012

माँ मैं क्या कहूं मेरे पास देने को तो कुछ भी नहीं है मुझे अपने जैसा बना दो बस ताकि मैं तेरा नाम रोशन करू एक और माँ के पास जाकर!! सुंदर पंकित्या…………. http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/05/11/तानाशाही-मंच/

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    Thankyou Sumit ji…

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 12, 2012

शायद यही मनुष्य का स्वभाव है जो है हमारे पास हम उसकी परवाह नहीं करते और जो नहीं है उसके लिए रोते रहते हैं….. ये कटु यथार्थ है साधना जी हम सभी के जीवन का…. … अगर जो मिला है उसे स्वीकार कर लें तो भी कोई गिला ही नहीं होता …… बहुत सही कहा आपने ….. बधाई आपको …लिखते रहिये …… (आप भी हिम्मतवाली है …ऐसे ही रहिये :) )

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    :) शुक्रिया महिमा जी…

pritish1 के द्वारा
May 12, 2012

थैंक्स साधना जी …. आप मुझे जी मत कहिये मैं आपसे उम्र मैं बहुत छोटा हूँ………..

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    प्रीतीश जी, जी कहने से कोई छोटा बड़ा नहीं हो जाता…. मेरे पिता जी कहते हैं जैसे व्यवहार की उम्मीद तुम दूसरों से करते हो वैसा ही व्यवहार तुम दूसरो के साथ करो…..

pritish1 के द्वारा
May 12, 2012

मुझे अच्छा लगा……….मैं जागरण junction मैं नया हूँ……..मेरे ब्लॉग मैं आपका स्वागत है………..आप मेरी कहानी “ऐसी ये कैसी तमन्ना” पढ़ सकते हैं…………..

yogi sarswat के द्वारा
May 12, 2012

माँ मैं क्या कहूं मेरे पास देने को तो कुछ भी नहीं है मुझे अपने जैसा बना दो बस ताकि मैं तेरा नाम रोशन करू एक और माँ के पास जाकर!! बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ! साधना जी , मैंने ऐसा देखा है की जैसा व्यव्हार माता पिता करते हैं लगभग वाही असर बच्चों पर आता है ! आपकी बहन ने आपकी दादी की सेवा की , इसमें जरूर आपकी माँ के संस्कार छुपे हैं जो उन्होंने अपने बच्चो को दिया हैं ! बहुत बढ़िया और प्रेरणादायक लेख !

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    Thankyou Yogi ji….

pritish1 के द्वारा
May 12, 2012

मुझे अच्छा लगा………..मेरे ब्लॉग मैं आपका स्वागत है …….मैं जागरण junction मैं नया हूँ

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    :) :) :) :)

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 12, 2012

अत्युत्तम पस्तुति !…… साधना जी,,,,,,,,,,,बधाई !! आप ने माँ से मांगकर माँ को बहुत बड़ी चीज दे दी ! पुनश्च !!

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    Thankyou Vijay ji…. :)

sinsera के द्वारा
May 12, 2012

बहुत खुबसूरत विचार साधना जी , हर माँ और हर बेटी के लिए अनुकरणीय…….

    May 12, 2012

    सादर प्रणाम काली मैया! हम भी यही कहना चाह रहे थे परन्तु आप ने कह दी अब हम चलते हैं…..सार्थक और अर्थपूर्ण आलेख साधना जी….!

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    सरिता जी विचार अगर जीवन में उतर आयें तो और भी आनंद आएगा….. :) :) Thank you Anil ji…. :)

चन्दन राय के द्वारा
May 12, 2012

साधना जी , माँ ऐसी ही होती , हर बात से ऊपर , हर कल्पना से ऊपर हर जज्बात से ऊपर , माँ सबसे ऊपर सबसे पहले , माँ के बारे में आपका सुन्दर लेखन

    sadhna के द्वारा
    May 14, 2012

    शुक्रिया चन्दन जी !!


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