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मेरा नन्हा फ़रिश्ता......

Posted On: 18 May, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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कैसे भागी भागी गयी थी मैं उसे देखने …… मुझे आज भी याद है वो लम्हा जब मैंने उसे अपनी गोद में उठाया था…. कितना छोटा था सा था वो… दोनों हाँथ की हथेलियाँ भी बड़ी पड़ रही थी उसके लिए…. 4 दिन का ही तो था…. लेकिन कैसे देख रहा था मुझे अपनी बड़ी बड़ी आँखों से…. कभी कभी मुस्कराता था मुझे लगता था जैसे की मेरी बातों पे ही हंस रहा है…. लेकिन वो तो अभी किसी और ही दुनिया में गुम था…. कितना शौक लगता था मुझे उसको अपनी गोद में सुलाने का…. उसका हर काम मैं करना चाहती थी जिससे की मैं उसके पास रह सकू…. लेकिन 2 दिन में मन भी कहाँ भरता है, वापस जो आना था सो आ गयी…. लेकिन हर दिन बार बार उसके बारे में पूछना….. उसको छुओ तो उसका गाल लाल हो जाता था उतनी जगह….. :) धीरे धीरे वो बड़ा होने लगा…. अभी 9 महीने का ही हुआ था कि उसको शिकागो जाना पड़ गया…. हाय अब मैं कैसे रहती 3 महीने उसके बिना…. लेकिन उसे जाना था तो वो गया…. चलना वही सीखा वो…. माँ बोलना भी वही सीखा…. जब वापस आया तो एअरपोर्ट गयी उसको लेने के लिए…. कितना शर्मा रहा था पास भी नहीं आ रहा था…. मैं तरस रही थी एक बार वो मुझे बुलाये…लेकिन वो तो जैसे मुझे पहचानता ही नहीं….. सब कुछ बोलने लगा लेकिन मुझे नहीं बुलाना सीखा…. जितनी ज्यादा मैं बेचैन थी उतना ही वो मुझे परेशान कर रहा था और इंतज़ार करवा रहा था…. यहाँ उसका दूसरा बर्थडे पड़ा मैं इस बार उसके पास ही थी…. जब पूरा function ख़तम हो गया तो वो मेरे पास आया और बोला “बुआ आओ” ….. मैं ख़ुशी से झूम उठी…. मैंने कहा फिर से बोलो कहता है बुआ…. दो तीन चार बार मैंने उससे बुआ बुलवाया…. और वो बोलता रहा…. मुस्कराता रहा…. मैंने पूछा २ साल के होने का इंतज़ार कर रहे थे क्या…. कहता है ‘हाँ’…. और हंसने लगा…. :) :) और अब ये मेरा प्यारा सा भतीजा दिन भर बुआ बुआ करता रहता है….. :) :) :)

SIDD

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

follyofawiseman के द्वारा
May 23, 2012

अच्छा है, लेकिन ये लेख मैंने कहीं और भी पढ़ा है…..शायद किसी अख़बार मे …..! कहीं आपने ने कही से कॉपी तो नहीं…………………………! नहीं नहीं आप ऐसा थोड़े न करेंगी…..

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 24, 2012

    जी हाँ मैंने कॉपी ही किया है….. और ये बच्चा भी मैं लेकर आई थी अपना भतीजा बनाने के लिए….

    follyofawiseman के द्वारा
    May 25, 2012

    इसका मतलब आप बच्चों का तस्करी करतीं है….ये तो गलत है…..लगता है feedback पर आपकी शिकायत करनी होगी……!

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 26, 2012

    जी हाँ…. आपको भी तो मैं वही से लेकर आई थी…… :)

    May 26, 2012

    हाँ….हाँ….हाँ…..!

pawansrivastava के द्वारा
May 23, 2012

बड़ा प्यारा है तुम्हारा लाड्लू पर ज़नाब की नज़र केक से नहीं हट रही

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 23, 2012

    :) हाँ दादा….. लेकिन आपका लाडला भी बहुत प्यारा है….. :) :)

yogi sarswat के द्वारा
May 20, 2012

ममता की डोर से बंधी हुई सुन्दर और सजीली दास्ता, बढ़िया प्रस्तुति !

चन्दन राय के द्वारा
May 20, 2012

साधना जी , आपके आलेख को पढ़कर यह बात तो पक्की है की आपकी नजरो में रिश्तो की बहुत ही अहमियत हैं सुन्दर विचार

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 23, 2012

    चन्दन जी मुझे लगता है कि रिश्ते ही ऐसे होते हैं जिनको कोई lifelong बरकरार रख सकता है…… फिर चाहे वो खून के हों या फिर विचारों से बने रिश्ते…..

Piyush Kumar Pant के द्वारा
May 20, 2012

इंसान किसी के भी द्वारा अनदेखा किए जाने पर उस बात को अपने अहम से जोड़ देता है…….. पर जब कोई बच्चा किसी को अनदेखा करता है तो कई सवाल मन मे उठने लगते हैं की आखिर क्यों ये मुझ से बात नहीं कर रहा ….. ये मुझसे शरमा रहा है या फिर डर रहा है….. फिर जैसे ही वो बच्चा हमसे घुल मिल जाता है एक अजीब सा सुकून मिलता है…….. अच्छी रचना……

satish3840 के द्वारा
May 19, 2012

नमस्कार साधना जी / बहुत खूबसूरत लिखा हें आपने / बच्चे होते ही प्यारे हें / उनकी तुतली जुबान सारी थकान मिटा देती हें व् अमूल्य व् अकल्पनीय सुख की अनुभूति होती हें

vikramjitsingh के द्वारा
May 18, 2012

ममता की डोर से बंधी हुई सुन्दर और सजीली दास्तान….

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 18, 2012

बुआ जी नमस्कार , आपके फरिस्ते के लिए ढेर सारा प्यार :) अच्छा लिखा .. बधाई

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 23, 2012

    :) शुक्रिया महिमा जी…..

Mohinder Kumar के द्वारा
May 18, 2012

बुआ और भतीजे के प्यारे से रिश्ते में बंधी रोचक दास्तान… लिखते रहिये

sadhna srivastava के द्वारा
May 28, 2012

:) :) :)


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