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रे मन तू क्यों उदास है.....

Posted On: 29 May, 2012 Others में

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रे मन, तू क्यों उदास है
क्यों ये टूटी हुई आस है…
उम्मीद न रख तू किसी और से
सब कुछ तो तेरे पास है…
रे मन तू क्यों उदास है!!

किसी में सामर्थ्य नहीं
जो तुझे कुछ दे सके…
हर इंसान तो इंसान मात्र है..
फिर भी तू उदास है!!

बंद कर तू अपनी
इच्छाओं का पिटारा
इस जीवन में सब कुछ
सिर्फ एक आभास है….
रे मन तू क्यों उदास है!!

न रुकता यहाँ सुख
न दुःख का निवास है
ये वक़्त भी बदल जायेगा….
बस आत्मविश्वास ही तेरे पास है….
रे मन तू क्यों उदास है!!!!

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 18, 2012

बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी…….कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने……….बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 2, 2012

न रुकता यहाँ सुख न दुःख का निवास है ये वक़्त भी बदल जायेगा…. बस आत्मविश्वास ही तेरे पास है… आदरणीय साधना जी, सादर अभिवादन बहुत सुन्दर , प्रेरणादायक रचना. . बधाई

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 30, 2012

प्रिय साधना जी देर से आने के लिए क्षमा .. कल लोगिन नहीं हो पा रहा था कविता तो कल ही पढ़ लिया था पर कमेंट्स नहीं दे पा रही थी .. बहुत ही सुंदर अभीव्यक्ति.. हम सब के मन का यही हाल है .. बहुत -२ बधाई आपको

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    Thankyou Mahima ji…. :) haan kuchh pareshaani chal rahi hai comments post karne me…. lekin deri ki koi baat nahi… jab tak kuchh naya na aaye…. deri nahi kah sakte… :) :)

sonam के द्वारा
May 30, 2012

रे मन, तू क्यों उदास है…………बहुत खूब लिखा है लेकिन क्या करे साधना जी ये मन समझता भी तो नहीं है , खुद भी बेचैन रहता है और हमे भी परेशान रखता है ! मन को समझती सुंदर रचना !

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    Sonam ji, ye man samajhta to hai lekin iske sath zara strict hona padta hai…. seedhepan ka fayda ye bhi uthata hai…. :) ek baat to mujhe abhi samah me aayi… jab apna man khud fayda uthata hai seedhayi ka to dusro ko to hum khamkhan blame karte hain…. hmm…

dineshaastik के द्वारा
May 30, 2012

किसी में सामर्थ्य नहीं जो तुझे कुछ दे सके… हर इंसान तो इंसान मात्र है.. फिर भी तू उदास है!! बंद कर तू अपनी इच्छाओं का पिटारा इस जीवन में सब कुछ सिर्फ एक आभास है…. साधना जी बहुत  ही सुन्दर सत्य को बयाँ करती हुई  प्रस्तुति…बधाई…..

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    Dinesh ji Thankyou…. सत्य का तो पता नहीं लेकिन जो सोचती हूँ महसूस करती हूँ वही लिख देती हूँ…..

चन्दन राय के द्वारा
May 29, 2012

साधना जी , जो आपकी तरह मन से इतनी सुन्दर तरीके से अपनी बात कहता है , वो हर गम पर जीत पा लेता है , आपको सायद हम सब का साथ पसंद नहीं , इसलिए आप अब झील के इस पार आ गई है , पर कोई बात नहीं आप के हितेषी यंहा भी आ धमकेंगे , सुन्दर रचना

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    शुक्रिया चन्दन जी…… ऐसी बात नहीं है…. मुझे तो यहाँ के लोगों का साथ इतना पसंद है की अब मुझे सपने भी आने लगे हैं…. जेजे के लोगों के….. :) :) मन को शांत करना बेहद ज़रूरी है….. बस इसीलिए. :)

anamika के द्वारा
May 29, 2012

जीवनोंमुखी कविता……प्रेरित करती हुई ……आभार

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    Thankyou so much Anamika ji… :)

fariyadhi के द्वारा
May 29, 2012

साधना जी बेहतरीन शव्दों का चुनाव सुन्दर पंक्तियां . रे मन, तू क्यों उदास है क्यों ये टूटी हुई आस है… उम्मीद न रख तू किसी और से सब कुछ तो तेरे पास है… रे मन तू क्यों उदास है!!

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    शुक्रिया फरियाधि जी….

Mohinder Kumar के द्वारा
May 29, 2012

साधना जी, यह सच है कि हमारी उदासी का कारण हमारे दिल से होता है. “some one has said… happiness and sadness is state of mind” और “मन चंचल, मन बाबरा, मन है ये चितचोर मन की मति चलिये नहीं, पलक पलक मन और”

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    Mohinder ji, sahmat hoon aapse…… thik hi kaha gaya hai…. Man ke mat pe mat pe mat chaliyo ye jeete jeete marwa dega……

follyofawiseman के द्वारा
May 29, 2012

प्रेमसुख (एक छात्र से) – हाथी को सुई के छेद में से गुजरने से कैसे रोका जा सकता है? चमन – बहुत ही आसान है, बस उसकी पूंछ में एक गठान लगा दो।

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    चमनलाल जी आप कब से चमन बन गए…?

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
May 29, 2012

साधना जी बहुत ही सुन्दर भाव-पूर्ण कविता

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    शुक्रिया अजय जी…. :)

pawansrivastava के द्वारा
May 29, 2012

वाह वाह ! शुभं अल्लाह ! रे मन तू क्यूँ उदास है जब तेरा दादा तेरे पास है :)


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