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सिर्फ एक दिन........???

Posted On: 18 Jun, 2012 में

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कल मैं 9 बजे सोकर उठी…. आखिर सन्डे था और पूरे ६ दिनों के बाद आया था…. तो नींद आये न आये पर देर से ही उठना है…. याद था कि आज Father ’s Day है…!! तकरीबन १२ बजे घर फ़ोन किया माँ पिताजी को….. पिताजी ने ही फ़ोन उठाया…. जय माता दी हुई…. फिर मैंने बहुत energy से कहा happy Father ’s day पिता जी….. !! पिताजी ने कहा ‘क्या’….. मैंने फिर से कहा….. तो पिताजी ने कहा थैंक्यू बेटा….. फिर उन्होंने पूछा ये father ’s day कब से मनाने लगे….. पहले तो नहीं होता था….. मुझे थोड़ी हंसी आई…. मैंने कहा हाँ पिताजी ये सब आजकल ज्यादा मनाने लगे हैं….. आजकल सारे डे मनाये जाते हैं…..!!

मेरे लिए हर वो दिन father ’s day होता है जब मैं अपने घर से दिल्ली आती हूँ….. वो पूरा दिन मेरे पिताजी को ही समर्पित होता है….. सुबह से लेकर ट्रेन छूटने तक….. यहाँ तक कि वो एक दो दिन पहले से ही मुझे अपने साथ रखने लगते हैं….. कही जाना होता है तो पूछते हैं यहाँ चलोगी…. इस मंदिर चलोगी….. वहां चलोगी….. ज्यादा से ज्यादा वक़्त हम दोनों ही साथ बिताते हैं….. उस वक्त तो वो मुझे मेरी माँ से भी बात नहीं करने देते….. अगर मैं रसोई में हूँ तो बुला लेते हैं अपने पास…..बतियाने के लिए…… और हम दोनों ही मस्त होकर बातें करते हैं….. हंसी मजाक….. गंभीर बातें…. अपने दोस्तों की बाते…. उनके पड़ोसियों की बातें….. कुल मिलकर ज़िन्दगी से जुडी हर बात करते हैं हम लोग….. बड़ा मज़ा आता है…… !!

काफी पहले एक कविता लिखी थी…. अपने पिताजी के जन्मदिन पर….. आज यहाँ आप सभी के सामने रखना चाहती हूँ…. !!

एक आरज़ू है माँ शारदा से, एक तमन्ना है दिल में
बेटी आपकी ही बनूँ मैं अपने हर जीवन में,
उठाना सिखाया, चलना सिखाया, और आज,
अपने पैरों पे खड़ा कर दिखाया,
विनती है माँ से, करे आपकी लम्बी उमर,
और आपका प्यार, हम सब को मिले जीवन भर,
जन्मदिन की मुबारक घड़ियाँ, खुशियाँ लाये आपके जीवन में,
इस वर्ष ये शुभकामना है, हम सब के मन में……. !!

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हम तीनो भाई बहन की आदत है कि हम जब भी अपने माँ पिताजी को कुछ भी लिख कर देते हैं…. या कोई गिफ्ट देते हैं…. या कोई ग्रीटिंग कार्ड देते हैं…. तो तीनों की तरफ से देते हैं…. इसीलिए इस कविता में भी “हम सब” लिखा है……

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ajaykr के द्वारा
June 26, 2012

कोई एक दिन प्रेम का,एक दिन फादर्स डे ,मम्मा का एक दिन हमे तो  आदत हैं हमेशा ईश्वर के साथ रहने का इसलिए रोज फादर्स डे ,मदर्स डे ,और शादी के बाद प्यार डे …… बहुत अच्छे उदगार आपके ……..आपकी लेखनी को सलाम .

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 28, 2012

    शुक्रिया अजय जी…..

yamunapathak के द्वारा
June 23, 2012

मेरे लिए हर वो दिन father ’s day होता है जब मैं अपने घर से दिल्ली आती हूँ….. वो पूरा दिन मेरे पिताजी को ही समर्पित होता है….. बहुत सही कहा.आपकी प्रतिक्रिया अपने ब्लॉग पर पढी.आपके पापा दोस्त के साथ अवश्य अनुशासन को भी महत्व देते होंगे.आपकी प्रतिक्रिया से यह बात मैंने महसूस की. शुक्रिया

yogeshkumar के द्वारा
June 20, 2012

मोहतरमा …थोडा और रोचक………….. खैर…….

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 21, 2012

    Yogesh ji Please complete your sentence…… :)

    yogeshkumar के द्वारा
    June 22, 2012

    मोहतरमा, मेरे कहने का मतलब था की अपनी कहानी को और पिता के प्रति आदर भाव को और भी रोचक तरीके से और अधिक शब्दों में बयां करें….. और कविता को और भी रोचक तरीके से पेश करें तो मजा आयेगा………. वैसे इस बात को अन्यथा न ले……………..

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 23, 2012

    जी योगेश जी… मैं ध्यान रखूंगी…. :)

jlsingh के द्वारा
June 20, 2012

आदरणीय साधना जी, नमस्कार! अच्छी लगी आपकी भावपूर्ण रचना जो कि बिलकुल यथार्थ है ….. सबसे अच्छा लगा — “उन्हें तो मेरा बनाया बेकार से बेकार खाना भी पसंद आ जाता है” बहुत सुन्दर! बाप ऐसा ही होता है!

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 20, 2012

    :) :) शुक्रिया सर, आपका बहुत स्वागत है!! जी ऐसा अक्सर होता है….. मैं जब भी कुछ बनाती हूँ सबसे अच्छा मेरे पिताजी को ही लगता है…… :) :)

dineshaastik के द्वारा
June 20, 2012

साधना जी बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण  प्रस्तुति……

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 20, 2012

    शुक्रिया दिनेश जी ….

चन्दन राय के द्वारा
June 19, 2012

साधना जी , आपके आलेख को पढ़कर यह प्रतीत होता है ,आपके दिल में रिश्तों और उसके मूल्यों की महता बहुत अधिक है , भगवान् आपके परिवार में ऐसी ही खुशहाली बनाये रखे

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 20, 2012

    शुक्रिया चन्दन जी…

pritish1 के द्वारा
June 19, 2012

नमस्ते साधना जी………… आपका लेख “अंत या शुरुआत ” पढ़कर मैं डर सा गया था……..उस लेख मैं कमेंट्स मैं कुछ लिख ही न पाया……… मैं आपसे एक कहानी शेयर करना चाहता हूँ…….आपका लाइफ का अनुभव मुझसे बहुत ज्यादा है………किन्तु मैंने अपने 17 वर्ष के अनुभव में अपने जीवन से यही सिखने का प्रयत्न किया है……………. Philosophy के एक professor ने कुछ चीजों के साथ class में प्रवेश किया. जब class शुरू हुई तो उन्होंने एक बड़ा सा खाली शीशे का जार लिया और उसमे पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े भरने लगे. फिर उन्होंने students से पूछा कि क्या जार भर गया है ? और सभी ने कहा “हाँ”. तब प्रोफ़ेसर ने छोटे-छोटे कंकडों से भरा एक box लिया और उन्हें जार में भरने लगे. जार को थोडा हिलाने पर ये कंकड़ पत्थरों के बीच settle हो गए. एक बार फिर उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने हाँ में उत्तर दिया. तभी professor ने एक sand box निकाला और उसमे भरी रेत को जार में डालने लगे. रेत ने बची-खुची जगह भी भर दी. और एक बार फिर उन्होंने पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने एक साथ उत्तर दिया , ” हाँ” फिर professor ने समझाना शुरू किया, ” मैं चाहता हूँ कि आप इस बात को समझें कि ये जार आपकी life को represent करता है. बड़े-बड़े पत्थर आपके जीवन की ज़रूरी चीजें हैं- आपकी family,आपका partner,आपकी health, आपके बच्चे – ऐसी चीजें कि अगर आपकी बाकी सारी चीजें खो भी जाएँ और सिर्फ ये रहे तो भी आपकी ज़िन्दगी पूर्ण रहेगी. ये कंकड़ कुछ अन्य चीजें हैं जो matter करती हैं- जैसे कि आपकी job, आपका घर, इत्यादि. और ये रेत बाकी सभी छोटी-मोटी चीजों को दर्शाती है. अगर आप जार को पहले रेत से भर देंगे तो कंकडों और पत्थरों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी. यही आपकी life के साथ होता है. अगर आप अपनी सारा समय और उर्जा छोटी-छोटी चीजों में लगा देंगे तो आपके पास कभी उन चीजों के लिए time नहीं होगा जो आपके लिए important हैं. उन चीजों पर ध्यान दीजिये जो आपकी happiness के लिए ज़रूरी हैं.बच्चों के साथ खेलिए, अपने partner के साथ dance कीजिये. काम पर जाने के लिए, घर साफ़ करने के लिए,party देने के लिए, हमेशा वक़्त होगा. पर पहले पत्थरों पर ध्यान दीजिये – ऐसी चीजें जो सचमुच matter करती हैं . अपनी priorities set कीजिये. बाकी चीजें बस रेत हैं.”

    pritish1 के द्वारा
    June 19, 2012

    साधना जी मेरा यह कमेन्ट आप मंच मैं सदैव बने रहे……सदैव हमारे साथ रहें………..इसी सन्दर्भ मैं है……… आपके नवीनतम पोस्ट के लिए धन्यवाद…….पढ़कर रिश्तों के विषय मैं कुछ समझने का अवसर मिला……..

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 20, 2012

    :) :) :) Thankyou Pritish ji..

allrounder के द्वारा
June 18, 2012

नमस्कार साधना जी, आशा है हम सब की तरह आपकी ये रचना आपके पिताजी को भी पसंद आई होगी :) इसे इस ख़ास दिन पर साझा करने के लिए आभार !

    sadhna srivastava के द्वारा
    June 19, 2012

    Namaskaar सचिन जी, अपने पिताजी की पसंद के बारे में क्या कहू…. उन्हें तो मेरा बनाया बेकार से बेकार खाना भी पसंद आ जाता है…… फिर इसमें तो बहुत सारी भावनाएं समाहित है….. :) :)


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